अपने दिल को बचाएं

August 30, 2018 - by Dr Jain - in Health, Medical, Uncategorized

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दिल के इस छोटे से अवयव पर इंसान का पूरा जीवन निर्भर करता है। भगवान न करे, लेकिन अगर कोई व्यक्ति हृदय-रोग से पीड़ित हो और डॉक्टर उसे एन्जियोप्लास्टी या बाईपास सर्जरी की सलाह दे, तब हमें चाहिये कि हम सभी तरह के विकल्पों को ध्यान में रखकर पूरी जानकारी लें।
आप सभी टीवी तो देखते ही हैं. उसमे लाइफ ओके पर आये एक सीरियल “एक नई उम्मीद रोशनी” में आपको मेरे लेखों में अकसर बताई जा रही डॉक्टर-हॉस्पिटल-मल्टीनेशनल कंपनियों के त्रिदोष के त्रिकोण की यानी कि लोभ, लालच और चिकित्सकीय हिंसक सच्चाई को बहुत ही खुले तरीके से बताया गया था. अगर आप इसे देखना चाहे, तो हॉट स्टार पर अभी भी देख सकते हैं.
इसमें साफ़ बताया गया है कि किस तरह एक मल्टी स्पेशलिटी हॉस्पिटल में स्टेंट का एक सप्लायर आकर बोलता है कि हम आपको सीधे हर स्टेंट रू. बीस हजार में देंगे और आप आराम से एक से डेढ़ लाख के स्टेंट को नब्बे हजार में लगाकर नाम भी कमा लेंगे.
फिर एक डॉक्टर यह भी कहते हुए दिखाया जाता है कि हम जिन मरीजो को गेस्ट्रिक ट्रबल से चेस्ट में दर्द हो रहा है, उनको भी जरुरत नहीं ओने पर भी दो स्टंट तो लगा ही देंगे. इस तरह हमे काफी फायदा होगा.
मान लो आपको ब्लाकिंग भी हो, तो क्या ये डॉक्टर ग्यारंटी लेंगे कि एक जगह स्टेंट लगाने से आगे दूसरी जगह फिर वो ब्लाकिंग नहीं होगी?
अरे भाई ज्यादा जरुरी यह है कि शरीर की खून की धमनियों में जो केलोस्ट्रोल के जमने की प्रवृत्ति बन गयी है, उसे रोकना ज्यादा जरुरी है.
नहीं तो अक्सर लोगो को दो-तीन साल में फिर से स्टेंट लगावाने होते हैं.
आप यह भी जान ले कि कई बार बेहद परेशान करने वाली खर्चीली ‘बाईपास सर्जरी’ की चिकित्सा प्रद्धति भी आपके लिए सर्वोत्तम साबित नहीं हो पाती है।
यह एक बहुत बड़ी विडंबना ही है कि एक ओर जहां भारत में ‘बाईपास सर्जरी’ और एन्जियोप्लास्टी का प्रचलन बढ़ता जा रहा है, वहीं अमेरिका में इसकी खिलाफत होने लगी है और तेजी से इसके विकल्प खोजने की कोशिश की जा रही है।
फिर इसके साथ ही आपका बहुत सी खतरनाक दवाइयों को रोज लेने का सिलसिला भी शुरू हो जाता है.
इनका परिणाम यह होता है कि आपके शरीर की केन्द्रीय नियंत्रण प्रणाली पूरी तरह से अस्त व्यस्त हो जाती है.
इससे आपके शरीर के सामान्य संचालन में पूरी तरह से रुकावट आ जाती है और उसे दवाइयां ही चलाने लगती हैं.
इस बात को स्पष्ट करने के लिये एक सत्य घटना का सहारा लेकर हम इसे समझते हैं –
हरीश वर्मा को 50 वर्ष की उम्र में एक्सरसाइज करते समय छाती में दर्द की शिकायत हुई। एंजियोग्राफी करवाने के बाद पता चला कि कोरोनरी आर्टरीज (धमनियों) में तीन स्थानों में ब्लाकेज (रुकावट) है। आखिर दो कार्डियोलाजिस्ट (हृदय-रोग विशेषज्ञों) ने कोरोनरी आर्टरी के बाईपास आपरेशन की सलाह दी। हरीश वर्मा ने भी सलाह मानकर आपरेशन की सहमति दे दी और डॉक्टर से आपरेशन की डेट भी ले ली।
आपरेशन के लिए अस्पताल में भर्ती होने से पहले एक दोस्त की सलाह पर हरीश वर्मा ने एक ओर डॉक्टर को भी दिखा लेना ज्यादा उचित समझा।
इस जिम्मेदार हृदय रोग विशेषज्ञ ने पूरी केस फाइल देखने के बाद आपरेशन न करवाने की सलाह दी, क्योंकि हरीश की कोरोनरी में तीन ब्लाकेज जरूर थे, लेकिन हृदय रोग नहीं था। हरीश को कभी भी हार्ट अटैक नहीं आया था, इसलिए उसके हृदय की मांसपेशियां पूरी तरह स्वस्थ थीं।
टी.एम.टी. करवाने से पता चला कि उनका हृदय पूरी तरह ठीक काम कर रहा था। सबसे महत्वपूर्ण बात यह थी कि उन्होने कभी भी अपने हृदय का न तो कोई इलाज करवाया था न कभी ‘लाइफ स्टाइल’ में बदलाव लाकर हृदय की कुछ खास देखभाल ही की थी।
इतनी सारी जानकारी और डॉक्टर की सलाह के बाद हरीश ने ‘बाईपास सर्जरी’ का इरादा कैंसिल कर दिया। उन्होंने डॉक्टर की सलाह पर रेगुलर एक्सरसाइज, लो फैट डाइट यानी कम चिकनाई वाली चीजें लेना शरू किया। कुछ ही महीनों में वह पूरी तरह से ठीक हो गए। आराम से एक्सरसाइज करने लगे, दर्द खत्म हो गया, उन्होंने सभी दवाइयां लेनी बंद कर दी और चुस्त-दुरुस्त लाइफ स्टाइल जीने लगे।
कुछ समय पूर्व 70 साल की उम्र में यही किस्सा हरीश के साथ फिर दोहराया गया। जून माह से हरीश का ब्लड प्रेशर हाई रहने लगा। एक समय तो यह 213/139 जितने खतरनाक पाइंट तक पहुंच गया। उन्हें अस्पताल में भर्ती किया गया।
कोरोनरी आर्टरी डिजीज का कोई लक्षण न होते हुए भी उनका एंजियोग्राम निकाला गया। रिपोर्ट से पता चला कि कोटोनरी आर्टरी में जर्बदस्त ब्लाकेज है। उन्हें तुरंत बाईपास की सलाह दी गई।
वे फिर दूसरे हृदय रोग विशेषज्ञ के पास ‘सेकंड ओपिनियन’ के लिए पहुंचे। पूरी जांच के बाद इस जिम्मेदार विशेषज्ञ ने फिर से इस प्रकरण में भी बाईपास सर्जरी को गैरजरूरी बताया। विशेषज्ञ के अनुसार हरीश की प्राब्लम थी हाई ब्लड प्रेशर और इसका हल बाई पास नहीं हो सकता था। विशषेज्ञ ने बाईपास भूलकर डाइट, एक्सरसाइज, विटामिन और मिनरल वगैरह के सप्लीमेंट्स पर और ज्यादा ध्यान देने को कहा।
दरअसल, ठीक हो जाने के बाद हरीश ने अपनी सेहत पर ध्यान देना छोड़ दिया था और लाईफ स्टाइल पहले जैसी कर ली थी। हालांकि ऐसा जानबूझ कर नहीं किया था। वास्तव में यह मानव स्वभाव ही है। थोड़ा ठीक होते ही हम परहेज में कोताही बरतने लगते हैं।
खैर, इस बार प्राब्लम होते ही हरीश ने फिर डाइट, एक्सरसाइज, सप्लीमेंटस आदि पर ध्यान देना शुरू कर दिया और कुछ ही दिनों में वे फिर ठीक हो गए। यही नहीं वह ब्लड प्रेशर के लिए जो दवाइयां लेते थे उनमें भी दो तिहाई कम लेने की जरूरत पड़ने लगी। हृदय के लिए महंगे इलाज की जरूरत ही नहीं रही।
कोरोनरी आर्टरी का बाईपास पहली बार 1967 में अमेरिका में हुआ था और इसका वैज्ञानिक मूल्यांकन सालों तक नहीं हुआ। जब हुआ, तब तक लाखों लोग बाईपास करवा चुके थे। पहले अध्ययन में 596 दिल के मरीजों को शमिल किया गया। ये मरीज या तो बाईपास करवा चुके थे या दवाइयां खा रहे थे।
इस अध्ययन का नतीजा काफी चैंकाने वाला था। इसके अनुसार बाईपास सर्जरी से कोई लाभ नहीं होता है। अध्ययन के अनुसार दोनो तरह के इलाजों (बाईपास सर्जरी और गोली-दवा से इलाज) में तीन सालों के बाद हार्ट अटैक होने या हृदय रोग की वजह से होने वाली मृत्यु का अनुपात लगभग समान है।
आमतौर पर ऐसे नतीजे के बाद बाईपास सर्जरी को असफल इलाज मानते हुए इसे चिकित्सा जगत में भुला दिया जाना चाहिए था। लेकिन ऐसा नहीं हो पाया क्योकि इसके पीछे और भी कारण थे, जिन्होने इस इलाज को भूली-बिसरी पद्धति बनने से रोक दिया।
इस पर हार्वर्ड मेडिकल स्कूल के चीफ आफ कार्डियोलाजी डॉ. यूजीन ब्रौनवाल्ड, एम.डी. ने पच्चीस-छब्बीस वर्ष पूर्व, ‘न्यू इंग्लैंड जर्नल आफ मेडिसिन’ में लिखा था,
‘‘ इस आपरेशन के पक्ष में एक इंडस्ट्री सी खड़ी होती जा रही है। धीरे-धीरे यह इतनी शक्तिशाली होती जा रही है कि इसके पर कतरना असंभव-सा लगने लगा है।“
डॉ. ब्रौनवाल्ड का यह कथन पच्चीस-छब्बीस साल पहले का है। इसके बाद से आज तक तो ‘यह इंडस्ट्री’ कई गुना विकसित हो गयी है। अब तो इस पर लगाम डालना शासन-प्रशासन के लिए भी संभव नहीं रहा है।
चिकित्सा जगत के विख्यात लेखक डॉ. व्हाइटेकर का दावा है कि यह सब बाई-पास सर्जरी और एंजियोप्लास्टी कभी भी मरीजों की जरूरत के अनुसार नहीं किया जाता और न इसका कोई वैज्ञानिक आधार है।
जैसे-जैसे हृदय की सर्जरी करने वाले नए-नए डॉक्टर तैयार होते जा रहे हैं, वैसे-वैसे इन अनावश्यक आपरेशनों की संख्या भी बढ़ती जा रही है।
अब ये आपरेशन मरीजों के हृदय के लाभ के लिए कम और डाक्टरों के हृदय के ऊपर बनी जेबों के लाभ के लिए ज्यादा किए जा रहे हैं।’’
इस अध्ययन की रिपोर्ट आने के छः साल बाद दूसरे अध्ययन की भी रिपोर्ट आई। इसमें साफ-साफ कहा गया कि बाईपास सर्जरी हर किसी को रास नहीं आती है और उनको बाद में बहुत सी काम्प्लिकेशन आ जाती हैं.
इस अध्ययन में एंजाइना और कोरोनर्री आटरी ब्लाकेज के 780 मरीजों का अध्ययन किया गया था। इनमें से आधे मरीजों ने ‘बाईपास सर्जरी’ करवाई थी और आधे मरीजों ने दवाइयां ली थीं। इस अध्ययन के नतीजे भी पहले अध्ययन से मिलते जुलते थे। आपरेशन करवाने वाले और दवाईयों से ठीक होने वाले, दोनों ग्रुपों में मृत्यु दर एक समान यानी दो प्रतिशत ही रही।
डॉ. जूलियन व्हाइटेकर, जिन्होने लोकप्रिय पुस्तक हेल्थ एंड हीलिंग’ लिखी है, वे इस बाई-पास सर्जरी और एंजियोप्लास्टी के बारे में लिखते हैं कि किसी भी तरह की बाईपास सर्जरी आपकी जान नहीं बचा सकती है।
डॉक्टरों द्वारा आपको डराया जाता है कि आप मृत्यु के दरवाजे पर खड़े हैं या आप चलते-फिरते टाइम बम हैं। इससे घबरा कर आप यह गैरजरूरी आपरेशन करवा लेते हैं।
इस ऑपरेशन के बाद में आपके ये डॉक्टर आपको यह भी कहते हैं कि आप इसीलिए जिंदा हैं, क्योंकि आपने समय रहते आपरेशन करवा लिया है।
तब आप वास्तव में डॉक्टर को भगवान समझ कर उनके आभारी रहते हैं, लेकिन वास्तव में आप आपरेशन करवाएं या नहीं, इससे कोई फर्क नहीं पड़ता, क्योंकि दोनों स्थितियों में आपके जीने के चांसेस एक जैसे ही रहते हैं। फिर ऐसा खतरनाक आपरेशन झेलने और इतना पैसा खर्च करने की क्या जरूरत है?’’
बाईपास सर्जरी का बढ़ता मायाजाल…
1979 से 1998 के बीच कार्डियोवैस्क्यूलर प्रोसीजर में करीब चार गुना बढ़ोत्तरी हुई है। आजकल अकेले अमेरिका में प्रतिवर्ष दस लाख से ज्यादा बाईपास सर्जरी और एंजियोप्लास्टी आपरेशन किए जाते हैं।
डॉ. व्हाइटेकर आगे लिखते हैं,
‘‘जब तक यह स्थिति बनी रहेगी, तब तक आपरेशन की इस चक्की में ‘गेहूं’ के साथ ‘घुन’ की बजाय ‘घुन’ के साथ ‘गेहूं’ पिसता रहेगा.”
डॉक्टर पर विश्वास करने वाले मरीजों को बाईपास की जरूरत समझाना कोई मुश्किल काम नहीं है। हालांकि अभी तक एक दर्जन से ज्यादा अध्ययन यह साबित कर चुके हैं कि बाईपास सर्जरी एक मायाजाल से ज्यादा कुछ नहीं है।
बाईपास सर्जरी की गलतियां…
पिछले कई वर्षों में हुई कई शोधों के अनुसार हार्ट अटैक के लिए कोरोनरी आर्टरी में स्थित ब्लाकेज की साइज से ज्यादा इसकी बनावट महत्व रखती है। अब यह बात हर कोई जानता है कि ज्यादातर हार्ट अटैक बड़े ब्लाकेज की वजह से नहीं, बल्कि बहुत छोटी क्षति से ही होते हैं।
डॉ. व्हाइटेकर का कहना है कि हृदय रोगियों का एंजियोग्राम लेने की बजाय कार्डियोलाजिस्ट (हृदय रोग चिकित्सकों) को दूसरे उपाय अपनाने चाहिए। जैसे उनको जानना चाहिए कि –
1. क्या हृदय बहुत अधिक डेमेज (क्षतिग्रस्त) हो गया है?
2. क्या एक्सरसाइज से दिल की धड़कन ठीक की जा सकती है?
3. क्या एंजाइना अनप्रेडिक्टेबल है?
डॉ. व्हाइटेकर के अनुसार कोरोनरी आर्टरी ब्लाकेज के बारे में जानने से ज्यादा ये रिस्क फैक्टर जानना ज्यादा महत्वपूर्ण है.
विशेषज्ञों के अनुसार आज जिन लोगों की बाईपास सर्जरी या एंजियोप्लास्टी की जा रही है, उनमें से नब्बे प्रतिशत मामले ऐसे होते हैं, जिनमें इनकी जरूरत बिल्कुल नहीं होती। जैसे कि हरीश के मामले में हुआ।
ज्यादातर मरीजों की सिर्फ लाइफ स्टाइल में बदलाव से ही काफी अच्छा रिजल्ट मिल सकता है। कभी-कभी दवाइयां भी प्रेस्क्राइब की जा सकती हैं, पर बाईपास या एंजियोप्लास्टी कटाई जरुरी नहीं है.
एंजियोप्लास्टी में डॉक्टर दिल की नली में एक स्प्रिंग डालते है जिसे स्टेंट कहते हैं।
यह स्टेंट अमेरिका में बनता है और इसको बनाने की कुल लागत मात्र 3 डॉलर यानी कि रू. 180/- होती है. इसी स्टेंट को भारत में लाकर एक से दो लाख रूपये में बेचा जाकर आपको लूटा जाता है। डॉक्टर के इस परिश्रम के लिए उसे लाखों रूपए का कमीशन भी मिलता है, इसलिए वह आपसे बार बार कहता है कि एंजियोप्लास्टी करवा लो.
आप एक बात स्पष्ट रूप से जान लें कि एंजियोप्लास्टी ऑपरेशन किसी का भी कभी भी सफल नहीं होता है, क्योकि डॉक्टर जो स्प्रिंग दिल की नली में डालता है, वह बिलकुल पेन की स्प्रिंग की तरह का होता है और कुछ ही महीनो में उस स्प्रिंग की दोनों साइड आगे व पीछे फिर से कोलेस्ट्रोल व फेट जमा होना शुरू हो जाता है.
अब फिर से इससे बचाव के लिए अमेरिका की कई बड़ी-बड़ी मल्टीनेशनल कंपनियां भारत में दिल के रोगियों को अरबो रुपयों की दवाईयां बेच रही हैं. इनके प्रभाव में आकर डॉक्टर भी आपको निम्न कई तरह की दवाइयों के जाल में फंसा देता है –
1. कोलेस्ट्रोल कम करने की गोली,
2. ह्रदय को सुचारू (?) रूप से चलाने की गोली,
3. खून की नली की चोकिंग से खून के प्रवाह में रुकावट न आये, इसलिए खून पतला करने की गोली,
4. बी.पी. की गोली,
5. दवाइयों के साइड-इफेक्ट से हो गयी डायबटीज की गोली,
6. इन दवाइयों को पचाने की और इनसे होने वाली एसिडिटी से बचाव की गोली,
7. इन दवाइयों से हो रही कमजोरी के लिए मल्टी-विटामिन की गोली,
उपरोक्त दवाइयों में से आपको कोई दवा एक बार, तो कोई दवा दो बार लेनी पड़ती है. इस तरह आपको रोज 12 से 15 गोली लेनी पड़ती है और आपका शरीर अब इन दवाइयों के असर से लड़खड़ाने हुए चलने लगता है.
साथ ही आप और आपकी पत्नी या पति डरे हुए भी रहते हैं कि अगर फिर से दिल की नली चोक हो गयी, तो आपको हार्ट अटेक आने की संभावना बढ़ जायेगी.
ये दवाइयां आपको आजीवन लेनी पड़ती हैं. कुछ सालों बाद किसी भी छोटी सी परेशानी होने पर डॉक्टर फिर से कहता है कि एंजियोप्लास्टी करवाओ. इस तरह आपके लाखो रूपए लुटते हैं और आपकी जिंदगी इसी तरह से परेशानी और उलझन में ख़त्म हो जाती है.
इस तरह डॉक्टर-हॉस्पिटल-मल्टीनेशनल कंपनियों का यह त्रिकोण हमारे देश में खूब फल-फूल रहा है और हमारे देश के हजारों करोड़ रूपये यह त्रिकोण हड़प रहा है.
इस त्रिकोण की हर भुजा दूसरी दोनों भुजाओं की मदद कर रही है और उन्हें सहारा दे रही है.
इस त्रिकोण ने पूरे देश को जकड़ लिया है. क्या आप इस त्रिकोण के चक्रव्यूह से छूटना चाहेंगे?
अगर आप अपने आप को ऐसी लाचारी और परेशानी से बचाना चाहते हैं, तो कृपया निम्न बातों का ध्यान रखें –
प्रत्येक पुरुष का अधिक से अधिक से अधिक 45 वर्ष और महिलाओं के लिए 55 वर्ष की उम्र के बाद उनका ह्रदय कमजोर होने लगता है. अतः इस उम्र के बाद ह्रदय की मांसपेशियों को ताकत देने के लिये, कोलेस्ट्रॉल लेवल को सही रखने के लिये, ह्रदय को मजबूती प्रदान करने के लिये, सांस फूलने से रोकने के लिये, रक्त धमनियों में जमा रुकावट को धीरे-धीरे कम करने के लिये, बी.पी. के नियंत्रण के लिए एवं अन्य इसी तरह के कई एंजियोप्लास्टी, बाई-पास सर्जरी और ह्रदय रोग या अन्य ह्रदय विकारों से बचाव के लिये दवाई के रूप में –
1. सबसे पहले आप सुबह 7 बजे कुल्ला करके सल्फर 200 को, फिर दोपहर को आर्निका 200 और रात्रि को खाने के एक से दो घंटे बाद या नौ बजे नक्स वोम 200 की पांच-पांच बूँद आधा कप पानी से एक हफ्ते तक ले
2. साथ ही Arjuna Q, Crataegus Ox Q और Cactus G Q; इन तीनो को मिलाकर 20-20 बूँद शुरू में सुबह और रात्रि को 9 बजे आधा कप पानी में डालकर तीन माह तक ले, फिर सिर्फ रात में एक बार रोज लम्बे समय तक या आजीवन लेना उचित रहेगा.
3. साथ ही ह्रदय की मजबूती और सामान्य खुशहाल जीवन जीने के लिये बायो काम्ब न. 27 की 6 गोली चार बार गुनगुने पानी से अवश्य लेते रहें.

ह्रदय तथा अन्य किसी भी बीमारी या परेशानी के लिए डॉ. स्वतंत्र जैन से संपर्क करें.

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आज की इस भाग-दौड़ भरी जिन्दगी में आपके पास अपने खुद के स्वास्थ्य की ओर ध्यान देने का भी समय नहीं रहता है.
लेकिन जब इस लापरवाही की आपको बहुत बड़ी सजा बीमारी के रूप में मिलती है, तब तक बहुत देर हो जाती है.
अतः अब देर न करें और अगर आप किसी भी तरह की शारीरिक समस्याओं जैसे कि डॉयबिटीज़, बी. पी., जोड़ों का दर्द, लिवर, किडनी, हार्ट से संभावित किसी भी बीमारी से ग्रस्त हैं और उसका जड़ से इलाज चाहते हैं या फिर डॉक्टर ने आपको किसी तरह का ऑपरेशन बताया है और आप उससे बचना चाहते हैं,
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प्रेसिडेंट : मुक्तियाँ विश्व शांति, सुख, सम्रद्धि ट्रस्ट
अध्यक्ष : अन्तर्राष्ट्रीय मानवाधिकार संघ, इंदौर
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