बार–बार जांच सेहत पर आंच

August 30, 2018 - by Dr Jain - in Health, Medical, Uncategorized

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किसी भी डॉक्टर के पास जाने पर वह आपसे कई तरह की जांच करवाएगा. किसी भी डॉक्टर के अनुसार –
1. अगर किसी व्यक्ति को घुटनों में दर्द है, तो एक्सरे करवाइए,
2. पेट दुखता है, तो अल्ट्रासोनोग्राफी करवाइए,
3. पीठ और कमर में टीस उठती है, तो फुल बोड़ी स्कैन करवाइए;
4. सिर में अक्सर दर्द रहता है, चक्कर आते है, तो सी. टी. स्कैन करवाइए.
5. खून की कई विभिन्न तरह की भी जांच की जाती है.
6. कुछ डॉक्टर तो इसके आगे MRI भी करवाते हैं.
7. सांस फूलती है, तो TMT और एंजियोग्राफी करवाई जाती है.
8. अक्सर डॉक्टर इस तरह के टेस्ट करवाने की सलाह देते ही रहते हैं और मजबूरी में बीमारी से निजात पाने के लिए मरीज इन्हें करवाते भी रहते हैं.
मेरे एक मित्र डॉक्टर जो M.D. MEDICINE हैं, वे कभी भी बुखार के शुरू में मलेरिया की जांच नहीं करवाते थे. वे पेट की जांच कर अगर spleen पल्पेटिंग होती थी, तो मलेरिया की दवाई देते थे, अन्यथा दूसरी दवाई देते थे.

लेकिन आज के हमारे डॉक्टर जांच भी करवाएंगे और साथ ही मलेरिया और एंटीबायोटिक्स दोनों को साथ-साथ दे देंगे, जिसके दुष्परिणाम मरीज को लम्बे समय तक और कई केसों में उनके बच्चों को भी भुगतना पड़ता है.

फिर ये डॉक्टर बड़ी ही मासूमियत से कह देंगे कि आजकल तो बच्चों को भी ह्रदय रोग, डायबटीज आदि कई तरह की खतरनाक बीमारी होने लगी हैं.

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक भारत में 60-70 फीसदी मेडिकल ट्रीटमेंट डायग्नोस्टिक लेबोरेटरी टेस्ट पर आधारित होता है, लेकिन बहुत कम लोगों को इस बात की जानकारी है कि इस तरह की जांचों से कई बार मरीज की सेहत पर काफी असर भी पड़ सकता है.

आज के अधिकाँश डॉक्टर इलाज शुरू करने से पहले मरीज के शरीर की सीधे जांच करने की जगह तरह-तरह की लैबोरेटरी जांचों की सलाह देते हैं और उनकी रिपोर्ट के आधार पर ही आगे बढ़ते हैं. लेकिन कोई भी चिकित्सक मरीज को एक्सरे, अल्ट्रासाउंड और सीटी स्कैन जैसी जांचों से होने वाले अवांछित रेडिएशन के बुरे असर की बात मरीजों को बताते नहीं हैं.

एंजियोप्लास्टी और ब्रेस्ट कैंसर का पता लगाने के लिए की जाने वाली मैमोग्राफी में रेडिएशन की हाई डोज का प्रयोग किया जाता है जो बहुत नुकसानदायक होता है.

डॉक्टरों के अनुसार मैमोग्राफी को हर साल करवाना जरुरी हो जाता है. फिर होता यह है कि जिस ब्रेस्ट कैंसर का पता लगाने के लिए यह टेस्ट की जाती है, वास्तव में उसी ब्रेस्ट कैंसर को बढ़ाने में ये जांचें मददगार हो जाती हैं.

एटॉमिक एनर्जी रेगुलेटरी बोर्ड के रेडिएशन विभाग के मुखिया ए. यु. सोनवाने बताते हैं कि एंजियोप्लास्टी जैसे इंट्रावेंशनल प्रोसीजर से गुजरने वाले मरीजों को उच्च मात्रा में रेसिएशन झेलना पड़ता है. यह प्रोसीजर की अवधि पर निर्भर करता है कि उन्हें इसकी कितनी मात्रा झेलनी पड़ती है.
कुछ मामलों में मरीजों को इस रेडिएशन से कैंसर भी हो सकता है.
नई दिल्ली के जवाहरलाल नेहरु यूनिवर्सिटी में जन स्वास्थ्य शोधकर्ता इंदिरा च. व्रती के अनुसार इमेजिंग तकनीक से मानव शरीर का एक्सरे करने पर वह मरीज एक्सरे-किरण, अल्ट्रासोनिक तरंगों और चुम्बकीय क्षेत्र के सम्पर्क में आता है. कई बार बेहतर इमेज के लिए रोगी के शरीर में रसायन भी प्रवेश करवाए जाते हैं. इनके तात्कालिक व दीर्घकालिक कुप्रभाव मरीज को झेलने पड़ते हैं.

बच्चे तो रेडिएशन के प्रति वयस्कों से भी कहीं अधिक संवेदनशील होते है. कुछ अध्ययनों से पता चला है कि बच्चों में रेडिएशन की वजह से कैंसर होने का खतरा बहुत ज्यादा रहता है. रेडिएशन के ओवर एक्सपोजर से आगे चलकर उन बच्चों की प्रजनन क्षमता भी प्रभावित हो सकती है.

कुछ समय पूर्व एक समाचार पत्र में छपी एक छोटी सी न्यूज के अनुसार ब्रिटेन की ऑक्सफ़ोर्ड और साउथैपटन यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने अपने एक साल तक चले सर्वे में 783 डॉक्टरों से किये गये ऑनलाइन प्रश्न और उनके उत्तरों के आधार पर यह निष्कर्ष निकाला है कि –

1. 97% डॉक्टरों ने माना है कि वे मरीजों को बेकार की दवाइयाँ देते हैं और गैर जरूरी जाँच करवाने को कहते हैं.
2. 88% डॉक्टरों के द्वारा ऐसी दवाइयाँ लिखी जाती हैं जिनमे इलाज करने के कोई सक्रिय तत्व नहीं रहते हैं.
3. 84% डॉक्टरों ने माना कि वे शुद्ध और प्रामाणिक इलाज के नाम पर ग्लूकोज का घोल या दवाई और सलाइन चढ़ाते है, जिसमे इलाज की कोई सक्रिय दवाई नहीं रहती है.
4. 84% डॉक्टरों ने माना कि वे मरीजों को गैरजरूरी खून की जाँच, एक्सरे तथा अन्य शारीरिक जाँच के लिए भेजते हैं.
हमारे देश के सन्दर्भ में जब हम इस रिपोर्ट को देखते हैं, तो हम पाते हैं कि –
हमारे देश के अधिकांश डॉक्टर पेमेंट बेसिस पर 20 से 30 लाख रूपये में MBBS की डिग्री लेते हैं, और पोस्ट-ग्रेजुएट करने में उन्हें 8-9 वर्ष और लगभग एक से दो करोड़ रूपये लगते हैं. अगर वे यह राशी बैंक से ब्याज पर ले, तो पोस्ट-ग्रेजुएट करने तक का कुल खर्च मय ब्याज के कम से कम दो से तीन करोड़ होगा.

इस तरह पैसे खर्च कर विशेषज्ञ डॉक्टर बनने वाले हर नवयुवक को अपनी लगाई गयी पूँजी पर बैंक का ब्याज ही हर माह का कम से कम ढाई लाख चुकाना पड़ेगा और मूल पूँजी के चुकारे के लिए भी कम से कम ढाई लाख देना होगा.

अतः जो डॉक्टर पांच लाख बैंक का चुकायेगा, वह अपने घर खर्च के लिए कम से कम कुछ राशी तो निकलेगा ही. इस तरह डॉक्टरी के बिजनेस में अधिकांश डॉक्टरों के लिए हर माह कम से कम छः लाख कमाना जरुरी है. तब कही जाकर 8 से 10 सालों में उनके द्वारा लिए गए लोन का वे चुकारा कर सकेंगे.

इसका मतलब यह है कि हर विशेषज्ञ डॉक्टर को महीने के 25 कार्य दिवस के अनुसार हर रोज रू. 25000/- कमाना अनिवार्य है.

यह विवरण तो डॉक्टरों की मज़बूरी का हिसाब है, किन्तु देखा गया है कि हमारे देश के डॉक्टर भी किसी भी मामले में ब्रिटेन से पीछे नहीं है और उन्होंने लोगों की दुःख-बीमारी में उनके शोषण के नए-नए तरीके ईजाद कर लिए हैं. अगर मैं इसके विवरण में जाऊँ, तो मेरा यह लेख थीसिस बन जायेगा. ड्रग ट्रायल, काल्पनिक बीमारियों का भय दिखाकर मरीजों और उनके परिवार का शोषण करना, जो बीमारी नहीं है, उसकी दवाई देना, जो तकलीफ नहीं है, उसका आपरेशन करना आदि, आदि.

अगर आपको इन जांचों से और इनके दुष्परिणामों से बचना है, अपने शरीर की इम्यूनिटी पावर बढ़ाना है और इसके साथ ही अन्य कई तरह की गंभीर बीमारियों से अपने परिवार को बचाना चाहते हैं, तो नियमित रूप से आपके परिवार में हो रही किसी भी बीमारी या परेशानी के लिए डॉ. स्वतंत्र जैन से स्वास्थ्य सलाह अवश्य लें.

100 वर्षों तक स्वस्थ, सुखी एवं खुशहाल जीवन जीयें –

आज की इस भाग-दौड़ भरी जिन्दगी में आपके पास अपने खुद के स्वास्थ्य की ओर ध्यान देने का भी समय नहीं रहता है.
लेकिन जब इस लापरवाही की आपको बहुत बड़ी सजा बीमारी के रूप में मिलती है, तब तक बहुत देर हो जाती है.
अतः अब देर न करें और अगर आप किसी भी तरह की शारीरिक समस्याओं जैसे कि डॉयबिटीज़, बी. पी., जोड़ों का दर्द, लिवर, किडनी, हार्ट से संभावित किसी भी बीमारी से ग्रस्त हैं और उसका जड़ से इलाज चाहते हैं या फिर डॉक्टर ने आपको किसी तरह का ऑपरेशन बताया है और आप उससे बचना चाहते हैं,
तो इसका समाधान है डॉ. स्वतंत्र जैन द्वारा बताया गया
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डॉ. स्वतंत्र जैन
प्रेसिडेंट : मुक्तियाँ विश्व शांति, सुख, सम्रद्धि ट्रस्ट
अध्यक्ष : अन्तर्राष्ट्रीय मानवाधिकार संघ, इंदौर
मोब. : +91 7777870145, +91 7400970145
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